मौत की रात | भाग – १
कोंकण के एक छोटे से गांव, नागोठणे, में आए हमें पांच साल हो गए थे। कुछ साल बाद हमें कोंकण का यह गांव अच्छा लगने लगा। हमने लगभग वहीं बसने का फैसला कर लिया था। चूंकि मेरे पिता वन विभाग में प्रभागीय वन अधिकारी थे, इसलिए हर तीन या चार साल में हमारा तबादला हो […]
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